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गृहस्थी

पति-पत्नी के विवाद का समाधान

घर का झगड़ा बाहर से छोटा लगता है और अंदर से पूरी ज़िंदगी घेर लेता है। जो लोग यहाँ आते हैं, उनमें ज़्यादातर एक ही बात कहते हैं — “कोई बड़ी वजह नहीं है, फिर भी रोज़ लड़ाई होती है।”

ऐसे मामलों में देखा जाता है कि दोनों की कुंडली का मेल कहाँ अटक रहा है, कोई ग्रह-दशा चल रही है, या बाहर से किसी की नज़र/दख़ल है। जो निकलता है, वही बताया जाता है।

जो बातें आमतौर पर सामने आती हैं

  • बिना वजह रोज़ का झगड़ा और चिड़चिड़ापन
  • एक-दूसरे पर शक
  • पति या पत्नी का किसी और की तरफ़ झुकाव
  • मायके या ससुराल का दख़ल
  • अलग रहना शुरू हो गया है या तलाक़ की बात चल रही है

दोनों की बात

जहाँ मुमकिन हो, दोनों की बात सुनी जाती है — एक तरफ़ की बात से पूरी तस्वीर कभी नहीं बनती। अगर दूसरा पक्ष आने को तैयार नहीं है, तब भी काम शुरू हो सकता है, पर यह साफ़ बता दिया जाता है कि उससे क्या फ़र्क़ पड़ेगा।

आगे क्या करें

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सवाल-जवाब

इस विषय पर आम सवाल

जो बात लोग सबसे ज़्यादा पूछते हैं — उसका सीधा उत्तर, बिना घुमाए।

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क्या पति/पत्नी को साथ लाना ज़रूरी है?

ज़रूरी नहीं, पर दोनों की बात सुनने से तस्वीर साफ़ होती है। अकेले भी आ सकते हैं।

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तलाक़ की बात आगे बढ़ चुकी है, अब कुछ हो सकता है?

ऐसे मामले भी आते हैं। पहली बैठक में देखा जाता है कि अब भी रास्ता है या नहीं — और अगर नहीं है, तो वही कहा जाता है। झूठी उम्मीद देना किसी के काम नहीं आता।

आपका सवाल यहाँ नहीं है?

सीधे पूछ लीजिए। आपकी बात सूफी अनीस जी तक पहुँचेगी और पूर्णतः गोपनीय रहेगी।